Facts about Kumbkaran in Hindi

रावण के बारे में तो हम सब ने सुना है कि वो बहुत शक्तिशाली योद्धा था। बहुत बड़ा शिव भक्त था। चार वेदों का ज्ञाता था लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि रावण का भाई कुंभकरण भी बहुत बड़ा योद्धा और ज्ञानी था।

हम आपको कुछ बातें बताने वाले हैं जो आपको पता होनी चाहिए।


पहली – कुंभकर्ण छह माह तक सोता क्यों रहता था?
कुंभकरण के छह माह तक सोने का कारण था ब्रह्मा जी का वरदान। ब्रह्मा जी ने रावण, विभीषण और कुंभकर्ण की भक्ति से प्रसन्न हो कर उन्हें वरदान मांगने को कहा। रावण ने कहा मुझे नर और वानर को छोड़ कर और कोई न मार सके। विभीषण ने भक्ति का वरदान मांगा लेकिन कुंभकर्ण इंद्रासन मांगना चाहता था, इंद्र देव ने मां सरस्वती से प्रार्थना की कि आप कुंभकर्ण की जुबान पर बैठ जाए और उसके मुंह से कुछ और निकलवा दें ताकि इंद्र आसान बच पाए।

मां सरस्वती कुंभकर्ण की जुबान पर बैठ गईं जब कुंभकर्ण वरदान मांगने लगा तो कुंभकर्ण के मुंह से इंद्रासन की जगह नींद्रआसन निकल गया और ब्रह्मा जी ने तथा अस्तु कह दिया।
कुंभकर्ण को अपनी गलती का एहसास हुआ तो कुंभकर्ण ने कहा मैं इंद्रासन मांगना चाहता था मुझसे गलती हो गई। ब्रह्मा जी ने कहा अब कुछ भी बदला नहीं जा सकता।
जिसके बाद कुभकर्ण वरदान मांगना चाहता था कि मैं एक दिन सोऊ और छह माह तक जागता रहूं लेकिन फिरसे उसके मुख से निकल गया कि मैं छह माह तक सोता रहूं और एक दिन जागूं। ब्रह्मा जी ने फिरसे तथा अस्तु कह दिया। कुंबकर्ण ने शमा मांग कर वरदान वापिस लेने के लिए कहा लेकिन ब्रह्मा जी ने कहा कि अब वरदान वापिस नहीं लिया जा सकता।


दूसरी- कुंभकरण बहुत बड़ा वैज्ञानिक था। 
जी हां यह में खुद से नहीं कह रहा, इसका उल्लेख आपको आशुतोष राणा की बुक में मिल जाएगा। अक्सर टीवी सीरियल और मूवीज में कुंभकरण को एक सुस्त, मोटा और कम दिमाग वाला दिखाया गया है लेकिन इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो इतिहास उसे वेदों का ज्ञाता, बहुत बड़ा ज्ञानी और बड़ा वैज्ञानी बताता है।
वो अक्सर ही विज्ञान के प्रयोग करता ही रहता था।
कहते हैं कि रावण के पास जो पुष्पक विमान था वो भी कुंभकरन ने बनाया था और बाद में वह विमान ब्रह्मा जी को सौंप दिया। कहते हैं कि बाद में वह विमान ब्रह्मा जी ने कुबेर को दे दिया जिनसे रावण ने यह विमान उनसे शीन लिया था।

आशुतोष राणा के मुताबिक कुंभकर्ण छह माह तक सोता नहीं रहता था बल्कि विज्ञान के प्रयोग करता रहता था। वो चाहता था कि इस बात का पता किसी को ना हो कि मैं विज्ञान के प्रयोग करता हूं इसलिए रावण ने चारों और यह ख़बर फैला दी थी कि कुंभकर्ण छह माह तक सोता रहता है और कोई कुंभकर्ण के पास ना जाए इसलिए रावण ने घोषणा कर दी कि अगर कोई कुंभकर्ण को निंद्रा से उठाता है तो इसे मृत्यु दण्ड दिया जाएगा।

कुंभकर्ण इतना बड़ा और मोटा कैसे हो गया
हमने आपको बताया कि कुंभकर्ण बहुत बड़ा वैज्ञानी था और वो अलग अलग प्रयोग करता रहता था जिसमें उसने एक प्रयोग थायराइड ग्लैंड का भी किया जिससे एक आम मनुष्य राक्षस की तरह बहुत बड़ा हो सकता था। सबसे पहले कुंभकर्ण ने उस प्रयोग को अपने ऊपर आजमाया जिसके फलस्वरूप कुंभकर्ण का आकार बढ़ गया और शरीर पहाड़ की तरह हो गया और कहते हैं कि इसी प्रयोग की वजह से उसका वैज्ञानिक कार्य बंद हो गया।

आपको बता दें कि कुंभकर्ण के इस यंत्र को "ग्रेट इंडियन" बुक में "विजार्ड आर्ट" का दर्ज़ा दिया गया है।

कुंभकर्ण था दूरदर्शी
कुंभकर्ण महान योद्धा और वैज्ञानिक होने के साथ साथ दूरदर्शी भी थे। जब उन्हें पता चला कि रावण माता सीता को उठा लाया है तो कुंभकर्ण ने अपने भाई रावण को कहा था कि माता सीता जी को आदर सहित श्री राम जी को लौटा दें नहीं तो आपके साथ साथ लंका का विनाश भी निश्चित है। 

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